फार्मेसी के कैरियर में आने वाला है बूम
फार्मेसी ‘दवा संबंधित’ आज के समय में एक ऐसा क्षेत्र बनकर उभर रहा है जिसने विश्व स्वास्थ्य सुरक्षा को एक छोटे से समूह में संकुचित कर दिया हैं। अगर देखा जाए तो एक व्यवसाय के तौर पर फार्मेसी एक उमंग व रोमांस पैदा करता है, क्योंकि इसमें बीमार लोगों की हर प्रकार से सेवा करने का मौका मिलता है। लेकिन दुर्भाग्य यह है कि एक फार्मेसिस्ट की भूमिका व योगदान को आज भी प्रतिष्ठा की नजरों से नहीं देखा जाता बल्कि केवल दवा की खरीद फरोख्त तक ही सीमित माना जाता है।
फार्मेसी एक महत्वपूर्ण व्यवसाय है व इसी को देखते हुए भारत सरकार ने १९४८ में फार्मेसी व्यवसाय को नियंत्रित व बतौर शिक्षा ब़ढावा देने के लिए ‘द फार्मेसी एक्ट’ लागू किया।
भारत में लगभग आठ लाख फार्मेसिस्ट हैं जो कि विभिन्न पदों पर कार्य कर रहे हैं, फार्मेसिस्ट स्वास्थ्य सुरक्षा के उनके क्षेत्र जैसे शोध, विकास, सेटिंग, क्वालिटी नियंत्रण, उत्पादन, पैकेजिंग, गुणवत्ता जांच आदि में लगे होते हैं। इसके अलावा हॉस्पिटल, कम्युनिटी, क्लीनिक आदि में सेटअप बनाते हैं व अध्ययन, रेगुलेटरी अफेयर व क्लीनिकल रिसर्च भी करते हैं।
अगर मूल्यांकन की बात की जाए तो भारतीय फार्मा इंडस्ट्री सेल्स वैल्यू के अनुसार विश्व का १४ वां सबसे ब़डा मार्केट है ‘सेल्स वैल्यू है २० बिलियन अमेरिकन डॉलर’ और सेल्स के क्षेत्र में विश्व में तीसरे स्थान पर भारत है। भारत विश्व के पांच सबसे ब़डे दवा उत्पादकों में से एक हैं। भारत अपने उत्पाद का लगभग ३० प्रतिशत पूरे विश्व में निर्यात करता है, क्लीनिकल रिसर्च में आज कई रोजगार विकल्प उपलब्ध हैं व एक अनुमान के अनुसार यह क्षेत्र तकरीबन सौ कऱोड से भी अधिक का बन गया है।
अगर फार्मेसी की प़ढाई की बात चले तो स्पेक्ट्रम इंस्टीट्य्ूट ऑफ फार्मेसी का नाम पीछे कैसे रह सकता है? इस इंस्टीट्य्ूट में यह डिग्री बहुत ही चुनौतीपूर्ण व अच्छा कैरियर है। युवाआें के लिए फार्मेसी के रूप में कैरियर बनाने का यहां अच्छा मौका मिलता है। साथ ही यहां प्लेसमेंट सुविधा भी इतनी अच्छी है कि इसमें कैरियर बनाने वालों को पैसा तो मिलता ही है साथ ही संतुष्टि भी होती है। इस इंस्टीट्य्ूट में फार्मेसी के अंतर्गत कई कार्यक्रम कराये जाते हैं। जिसमें युवा प्रशिक्षण कर सकते हैं जैसेः
यहां कोई भी दवाइयों के निर्माण व उत्पादन, दवाई विक्रेता, एक्जीक्यूटिव, मैैनेजर आदि बन सकता है, दूसरे सेग्मेंट में दंत दवा के क्षेत्र के उत्पादों के निर्माण में कैरियर बनाया जा सकता है जैसे टूथपेस्ट, माउथवॉश डेंटल कैविटीफिलर, कॉस्मेटिक, साबुन आदि। रक्क्त भी एक अलग क्षेत्र है। जिसमें विभिन्न रक्त समूह, रक्त बैग का उत्पादन, हिमोग्लोबीन, प्लास्मा, सेरम, क्लोरिंग फैक्टर एंटीजन, एंटीबॉडी व बायोटेक्नोलॉजिकल उत्पादों का निर्माण, सर्जिकल ड्रेसिंग, मेडिकल यंत्र, आयुर्वेदिक, होम्योपैथिक व यूनानी दवाआें के क्षेत्र में इस इंस्टीट्य्ूट के छात्रों का बहुत स्वागत होता है।
फॉर्मुलेशन एंड डेवलपमेंट ‘एफ एंड डी’ः किसी भी कंपनी की सफलता इसी पर निर्भर करती है कि उसके उत्पाद कितनी अच्छी क्वालिटी के हैं? क्लीनिकल ट्रायल बायोइक्वीलेंस अध्ययन टोक्सीलॉजिकल अध्ययन ऐसी सब जगहों पर क्लीनिकल रिसर्च की अधिक मांग होती है, क्योंकि हर चीज की बारीकी से जांच की जाती है।कोई भी ड्रग या दवा जिसका निर्माण मानव के इस्तेमाल केे लिए किया जाता है, उसकी क्वालिटी बहुत अच्छी व शुद्ध होनी चाहिए उसमें कोई भी गलत मिलावट नहीं होनी चाहिए। दवाइयों में निर्देशित मिलावट अब चाहे वह निर्माण के दौरान हो या फिर स्टोरेज के लिए किया जाए, सब बहुत ही बारीकी से जांचे जाने चाहिए। इसीलिए फार्मास्युटिकल इंडस्ट्री के लिए क्वालिटी कंट्रोल और क्वालिटी एश्योरेंस बहुत ही महत्वपूर्ण विभाग होते हैं। यहां बेहद प्रशिक्षित व अनुभवी स्टाफ की आवश्यकता होती हैं।
हॉस्पिटल फार्मेसी ः फार्मेसी के छात्रों के लिए हॉस्पिटल फार्मेसी के तौर पर भी कई ओपनिंग मिल सकती है। वे हॉस्पिटल या ड्रग स्टोर पर कार्य कर सकते हैं। ऐसे प्रोफेशनलों को अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, कनाडा में भी बुलाया जाता है। यह चलन भारत में भी शुरू हो चुका है। यहां पर फार्मासिस्ट मरीज की हालत के अनुुसार दवाइयां निर्देशित करता है। दवाआें की डोसेज आदि निर्धारित करता है। यह क्षेत्र विकसित देशों में तो बेहद प्रचलित हो चुका है। ये भारत में जल्दी ही शुरू हो जाएगा। स्पेक्ट्रम इंस्टीट्य्ूट के फार्मासिस्ट ब़डी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए मरीज और मेडिकल सुविधाआें के बीच सामंजस्य बनाते हैं। वे मरीज को दवाआें से संबंधित पूरी जानकारी देते हैं।
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फार्मेसी के छात्रों के पास रोजगार का एक और अवसर होता है, शिक्षा। वे लेक्चरर, रीडर असिस्टेंट प्रोफेसर, प्रोफेसर, प्रिंसिपल के तौर पर कार्य कर सकते हैं। उन्हें अच्छा वेतन व इज्जत मिलती है। इसके अलावा वे शोध कार्य में भी शामिल हो सकते हैं। ड्रग एंड फार्मा इंडस्ट्री में एफ डी ए ‘फूड एंड ड्रग कंट्रोल एडमिनिस्ट्रेशन’ सबसे ब़डा संगठन है, जो कि इस क्षेत्र को मैनेेज करता है। एफडीए की शाखाएं देश के लगभग हर राज्य में हैं। स्पेक्ट्रम इंस्टीट्य्ूट के ग्रेजुएट्स के लिए ड्रग इंस्पेक्टर सीनियर ड्रग इंस्पेक्टर, डिप्यूटी ड्रग कंट्रोलर, असिस्टेंट ड्रग कंट्रोलर, ड्रग कंट्रोलर और फिर ड्रग कंट्रोलर ऑफ इंडिया के पद का मौका भी उपलब्ध रहता है।
आज प्रोफेशनल इस क्षेत्र में अच्छा पैसा व नाम कमा सकते हैं। वे रिटायरमेंट के बाद भी यहां काम कर सकते हैं। फार्मेसी में कई तरह से कंसल्टेंसी सुविधाएं प्रदान की जाती हैं। स्पेक्ट्रम इंस्टीट्य्ूट के फार्मेसी छात्रों को इतना ज्ञान व प्रशिक्षण दे दिया जाता हैै कि उनके लिए बाहरी देश जैसे अमेरिका, कनाडा, यू के, फ्रांस, जर्मन, दअफ्रिका, सिंगापुर, कोरिया, जापान आदि में रोजगार के अवसर मिलते हैं। इ
फार्मेसिस्ट का वेतन, आय व उनके कार्यक्षेत्र, कार्यस्थल, कार्य करने की जगह, काम की जिम्मेदारी, गुण व अनुभव पर निर्भर करता है। कॉमर्स एंड इंडस्ट्री मिनिस्ट्री के अनुसार, फार्मास्युटिकल क्षेत्र में लगभग २२ लाख रोजगार की संभावनाएं हैं। सन् २००८ में भारत में फार्मा डी कार्यक्रम की शुरुआत होने से देश में क्लीनिकल फार्मेसी के अभ्यास को भी आरंभ मिला जिसके कारण फार्मासिस्ट के लिए नई कैरियर संभावनाएं पैदा हुई हैं। यह देखते हुए फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया फार्मेसी अभ्यास करने के लिए नए नियम बनाने की प्रक्रिया में लगी है ताकि फार्मेसिस्ट एक परामर्शदाता के रूप में भी कार्य कर सके। हमारे देश में फार्मा डी के अलावा अन्य कई कोर्स भी है जैसे फार्मेसी में डिप्लोमा, बैचलर ऑफ फार्मेसी, मास्टर ऑफ फार्मेसी व फार्मेसी की फिलोसॉफी में डॉक्टरेट भी की जा सकती है।
प्रेमा राय
