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सफल व सुखमय जीवन जीने के उपयोगी उपाय

Swatantra Vaartha  Mon, 30 Aug 2010, IST

सफल व सुखमय जीवन जीने के उपयोगी उपाय

आज के भौतिकवादी युग में बाजारू संस्कृति की चपेट में आया व्यक्ति आपाधापी एवं जल्दबाजी के परिणामस्वरूप अत्यधिक तनावग्रस्त होकर बहुत दुखी जीवन जी रहा है। सफलताएं हाथ न लगने से और महत्वकांक्षाआं तथा इच्छाआे की पूर्ति न होने से आज व्यक्ति अत्यधिक परेशान व हताश नजर आता है। अनेक लोग तो परेशानियों के कारण आत्महत्याएं करने से भी नहीं चूकते। अस्तु! आज का मानव सार्थक, सफल व सुखमय जीवन जीना चाहता है। सफल, सुखमय व सार्थक जीवन जीने के लिए अपने जीवन में इन बातों पर विशेष रूप से ध्यान देंः

* कठिन परिश्रम करें। द़ृढ संकल्पी बनकर अपने लक्ष्यों को हासिल करें तथा सभी काया] को आत्मविश्वास से करें।

* ‘सादा जीवन उच्च विचार’ को अपने जीवन का आदर्श बनाएं तथा ‘वसुधैव कुटुम्बकम्‌’ पर विशेष बल दें।

* संघर्ष का नाम ही जीवन है। संघषा] का निडरता से सामना करें।

* जिन्दगी की हर द़ौड के प्रति सकारात्मक सोच रखें और सृजनात्मक कार्य करें तथा कुछ नया करने की सोचें।

* परिवर्तन ही जीवन है, उत्साह व उमंग है तथा ठहराव, निराशा व मौत है। सफलता की महत्वपूर्ण स़ीढी है अन्यों से कुछ हटकर नया करके जनजन को चौंकाएं। इससे वर्तमान व भविष्य बनेगा।

* किसी भी काम को प्रतिष्ठा की तराजू में न तौलें।

* अहंकारी विचारधारा से किसी कर्म को न करें।

* बिना फल की आशा किए कर्म करें और जो भी कर्म करें, उसे पूर्ण आस्था, विश्वास, श्रद्धा व लग्न के साथ करें।

* सार्थक, सफल व सुखमय जीवन जीने हेतु समय बर्बाद न करें। आज का काम आज ही करें वह भी सही तरीके से ।

* सोच व समर्पण एवं कुछ कर गुजरने की भावना सच्चे मन से हो तथा योजनानुसार कार्य करें तो ही अच्छा होगा।

* आप सच्ची लग्न एवं अपने सार्थक प्रयासों से ऐसे सुकर्म करें कि जनमानस स्वतः ही प्रभावित हो और आपके व्यक्तित्व में चार चांद लगें। मानव से महामानव बनने का अथक प्रयास करें।

* आज की सूचना क्रान्ति एवं तकनीकी उन्नति के युग में जो सुअवसर आपको मिल रहा है, उसका सदुपयोग करने से नहीं चूकें। तभी आप अपनी क्षमताआें का सदुपयोग कर सफलता प्राप्त कर सकेंगे।

* अच्छे भविष्य हेतु व सदैव सफलता प्राप्त करने के लिए और प्रभावशाली व्यक्तित्व का निर्माण करने के लिए आदशा] को अपनाएं, आध्यात्मिकता को अपनाएं तथा नैतिकता के सिद्धांतों पर चलें।

* सफलता को अपना लक्ष्य बनाने वाले व्यक्ति पुरुषाथर्ीं बनकर कभी भी विचलित नहीं होते और निरंतर आगे ब़ढते हुए प्रगति करते रहते हैं।

* संकल्पवान व्यक्ति ब़डी से ब़डी चुनौतियों, विपदाआें के आगे कभी घुटने नहीं टेकते और ‘चरैवेति चरैवेति’ को आदर्श मानते हैं।

* बुद्धि का विकास शारीरिक स्वस्थता से ही संभव है। शारीरिक स्वस्थता हेतु तेजस्विता, ओजस्विता व वर्चस्वता अति आवश्यक हैै।

* सदाचार, संयम साहित्यिकता को जीवन में अपनाएं।

* काम, क्रोध, अहंकार, ईर्ष्या, द्वेष, मोह, माया, वैमनस्य आदि के चक्कर में भूलकर भी न प़डें।

* भोग विलास, इन्द्रिय लोलुपता, मांसमंदिरा व ऐसे ही अन्य पदाथा] के सेवन की प्रवृत्ति प्राण हर लेती है।

* स्नेह, सौहार्द, सहिष्णुता, सहभागिता, संयम व सदाचार सफलता की प्रमुख सी़ढयां है।

* आंखों में सार्थक सपने संजोयें।

* अपनी सीमाएं पहचानें और स्वयं के पुरुषार्थ को न भूलें।

* सत्य, अहिंसा व अपरिग्रह के मार्ग पर चलें। इससे आपको असीम संतोष एवं शांति की प्राप्ति होगी।

* प्राथमिकता से तप करें।

* ब़डों का मानसम्मान करें, उनके प्रति श्रद्धा रखें और उनसे कुछ न कुछ अच्छी बातें सीखने का पूर्ण प्रयास करें।

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