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सफर में बरतें थ़ोडी सावधानी तो नहीं होगी परेशानी

Swatantra Vaartha  Tue, 7 Sep 2010, IST

सफर में बरतें थ़ोडी सावधानी तो नहीं होगी परेशानी

मौसम कोई भी हो, आधुनिक युग में यात्राएं जारी रहती हैं चाहे काम काज के सिलसिले में हो या पर्यटन के लिए या मित्रों रिश्तेदारों के घर जाना हो। गर्मियों के प्रकोप से बचने के लिए भी अक्सर लोग सर्दियों के मौसम में, ब़डी संख्या में लोग कई प्रकार की यात्राआें पर जाने की योजना काफी पहले ही बना लेते है और छुट्टिया मिलते ही सफर पर निकल प़डते है। यह यात्रा कई प्रकार ही हो सकती है, जैसे कि ऑफिशियल टूर, फैमिली टूर या फन टूर आदि। इसके साथ ही नए वर्ष पर भी लोग समय मिलते ही पर्यटन का लाभ उठाने से चूकते नहीं है।

लेकिन अक्सर हमारेे यात्रा व पर्यटन के स्थानों पर सुविधाआें की कमी रहती है और यात्रा में तबियत खराब हो जाने पर तो काफी तकलीफ झेलनी प़ड सकती है। यह दुखद बात है पर यात्रा में स्वयं को बीमारी से बचाने का काम तो हम स्वयं कर ही सकते हैं। अधिकतर उच्च आयु वाले भारतीय अपने भारत की सांस्कृतिक विरासत और खूबसूरत जगहों की ग़ूढता का अन्वेषण करने के लिए घूमने जाते हैं। उन्हें ये मालूम भी नहीं होता है कि ट्रैवल स्ट्रैस जैसी कोई चीज होती है। वैसे अधिकतर लोगों के लिए ऑफशोर ट्रैवल बेहद आनंदमय होता है, किंतु यदि लोगों ने अपनी यात्रा के लिए पर्याप्त तैयारी न की हो और अपने साथ जरूरतमंद सामान जिन्हें प्रायः जरूरी नहीं समझा जाता है, क्योंकि यात्रा में तनाव भी होता है, यह सच है और इसका संबंध उच्च रक्तचाप, अल्सर व कई अन्य बीमारियों से है। जैसे दवाइयां, पट्टियां आदि जिनसे किसी प्रकार की स्वास्थ्य संबंधी बीमारियों से ल़डा जा सकता है तो उनका ट्रैवल बहुत दुःखदायी भी हो सकता है। यदि दूसरे शब्दों में बात की जाए तो मतलब यह है कि टिकट व पर्स जैसी चीजों की तरह आपके साथ एक भरपूर फर्स्ट एड किट भी होनी चाहिए और यदि आप इस असमंजसता में हैं कि सही फर्स्ट एड किट में क्याक्या होना चाहिए और क्याक्या आवश्यक है तो चिंता मत करिए हम आपको बताते हैं।

कुछ समय पहले तक यात्रा तनाव, जो कि एक तरह की बीमारी है, इसके बारे मेंं बहुत कम ही लिखा या जाना जाता था, लेकिन अब यात्रा तनाव को उच्च ब्लडप्रेशर, अल्सर आदि अन्य लक्षणों के साथ ज़ोडा जाता है। यात्रा संबंधी तनाव के और भी कई लक्षण हैं जैसेखाना न पचना, सिरदर्द, दमा, चिंता, थकावट आदि जिनसे यात्री की कार्यक्षमता पर भी नकारात्मक प्रभाव प़डता है।

अक्सर यात्रा के दौरान लोग एक साधारण सी बीमारी से ग्रस्त हो जाते हैं जिसे ट्रैवलर्स डायरिया कहा जाता है। जिसके कारण होते हैं जैसे प्रदूषित भोजन का सेवन, आहार में बदलाव या मौसम में बदलाव के कारण साफ सफाई का अभाव, कंडीशन आदि। इस संक्रमण के आम लक्षण हैं डायरिया, जी मचलाना, एब्डोमिनल क्रैम्पस, ब्लोटिंग, ज्वर,बेचैनी आदि जो प्रायः तीन से सात दिन तक रहते हैं।

एक और समस्या से जिससे हर वर्ष लाखों लोग दो चार होते हैं वह है मोशन सिकनेस। मोशन सिकनेस के लक्षण हैं बेचैनी, उल्टी व चक्कर आना आदि। नई दिल्ली के साकेत स्थित मैक्स अस्पताल के फीजिशियन कंसल्टेंट डॉ आर एस मिश्रा के अनुसार, मोशन सिकनेस को गंभीरता से लेना चाहिए। यह शरीर की विभिन्न प्रणालियों के संतुलन पर असर डालती है। असंतुलन के नतीजे डीहाईड्रेशन, कमजोरी और मतिभ्रम आदि समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। मोशन सिकनेस में उल्टी होने से बेचैनी से राहत नहीं मिलती जैसा की सामान्य बीमारी में होता है। मोशन सिकनेस के मानसिक प्रभाव भी होते हैं,क्योंकि रोगी यात्रा के नाम से ही डरने लगता है।

बेहतर यह होगा कि घर पर एक फर्स्ट एड किट बना कर रखें जो आपके घर में ही नहीं बल्कि यात्रा में भी काम आएगा, यात्रा व मौसम के हिसाब से आप उसमें थ़ोडा बहुत परिवर्तन कर सकते हैं। समय के साथ एक्सपायर हो चुकी दवाआें को बदल लें। एक फर्स्ट एड बॉक्स में जो चीजें अवश्य होनी चाहिए वे हैं जैसेः बैंडेज, गॉज पैड, आयोडीन और एल्कोहोल प्रेप पैड, बटरफ्लाई बैंडेज, मेडिकल एडहेसिव टेप, मोस्कीटो रेपेलेंट, इलेक्ट्रोलाइट्‌स, एंटाएसिड, एंटीबायोटीक ओइंटमेंट, एंटीडायरियल, एंटीहिस्टामाइंस और इफेक्टिव पेन और फीवर रिलिवर्स आदि। इन सब चीजों से सर्दी, जुकाम, चोट, जलन, जख्म आदि का प्राथमिक उपचार किया जा सकता है, लेकिन इसके साथ यह भी आवश्यक है कि इस्तेमाल करने वालों को फर्स्ट एड बॉक्स में रखी हर वस्तु का उच्च प्रयोग करना चाहिए। उदाहरणत ः जख्म हो जाने पर या चोट लग जाने पर गॉज पैड आयोडीन, एल्कोहोल प्रेप पैड की मदद से चोट को साफ कर सकते हैं और एंटीबायोटिक ओइंटमेंटट और बैंडेज को चोट को आगे फैलने या कंटेमिनेट होने से बचाने के लिए लगाया जाता है जो कि चोट को ठीक करने की प्रक्रिया है। इसी तरह, जब दूषित भोजन या पेय पदार्थ का सेवन कर लिया जाए तो डायरिया के प्रकोप को कम करने के लिए एंटी डायरियल्स का इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि इन दवाइयों को इस्तेमाल में लाने से पहले सावधानी बरतनी चाहिए और इससे भी पहले दवाइयां कब और कैसे खानी चाहिए इसके बारे में डॉक्टर से पूरी जानकारी ले लेनी चाहिए।

डायरिया के दौरान, इलेक्ट्रोलाइट्‌स के इस्तेमाल को कभी भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, क्योंकि बहुत से केसों में तो पानी में घुले इलेक्ट्रोलाइट्‌स के सेवन से भी मरीज बाकी अन्य दवाइयों के मुकाबले जल्दी ठीक होता है। यदि आपको लंबी यात्रा के दौरान नौसिया, वमन या चक्कर आना जैसी समस्या हो तो एंटी एमेटिक ड्रग एवोमीन लेना चाहिए जिसमें प्रोमेथाजाइन थ्योलेट की मात्रा होती है। ये दिमाग के बीचों बीच असर करती है जिससे शरीर के सभी सिस्टमों के बीच संतुलन बना रहता है, मगर गर्भावस्था के दौरान इसका सेवन सावधानी से करना चाहिए।

एंटीहिस्टमाइंस से छींक, बहती नाक, आंखों में पानी आना, आंखों में खुजली आदि समस्याएं जो प्रायः प्रदूषण, प़ेड या घास आदि से एलर्जी के कारण उत्पन्न हो जाती हैं को राहत मिलती है। दुबारा इनका सेवन करने से पहले डॉक्टरी सलाह अवश्य ही ले लेनी चाहिए, क्योंकि ये एंटीहिस्टमाइंस सेडेटिव होती है और यदि इनकी मात्रा ज्यादा हो जाए तो मरीज के लिए हानिकारक भी हो सकती हैं।

फर्स्ट एड किट में एक आवश्यक चीज है दर्द निवारक गोलियां व बुखार की दवा। ऐसी स्थिति में पैरासिटामोल का ही चुनाव करना चाहिए, क्योंकि ये बुखार व दर्द के लिए सुरक्षित दवा के रूप में प्रमाणित की जा चुकी हैं। तो अगली बार जब आप किसी यात्रा पर जाएं तो फर्स्ट एड किट ले जाना न भूलें, क्योंकि छोटी सी लापरवाही आपकी छुट्टियों का मजा किरकिरा कर सकती है।

उमेश कुमार

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