दिमाग को कैसे रखें चुस्तदुरुस्त
दिमाग शरीर का सबसे महत्वपूर्ण अंग है। जीवन की सारी दिनचर्याएं इसी के द्वारा संचालित होती हैं। दिमाग को लेकर लोगों में भ्रामक धारणाएं प्रचलित हैं कि ब़ढती उम्र का दुष्प्रभाव दिमाग पर प़डता है और ब़ढती उम्र के साथ बुद्धि कमजोर होने लगती हैं, लेकिन लोगों का ऐसा मानना सही नहीं है।
वास्तविकता यह है कि उम्र ब़ढने के साथ दिमाग और विकसित होता है। दिमाग की कोशिकाएं उम्र ब़ढने के साथ लगातार बनती रहती हैं, लेकिन कोशिकाआें के बनने की दर सभी व्यक्तियों में एक जैसी नहीं होती। प्रत्येक व्यक्ति की शारीरिक संरचना के अनुसार कोशिकाआें के बनने की दर अलगअलग होती है। दिमाग शरीर के लिए आवश्यक ऑक्सीजन का २५ प्रतिशत तथा ग्लूकोस का ७० प्रतिशत उपयोग करता है जिससे उम्र ब़ढने के साथ यह विकसित होता रहता है।
आज की परिवर्तित जीवनशैली के कारण न तो हम स्वास्थ्य संबंधी नियमों का अनुसरण कर पाते हैं और न शरीर व दिमाग का ठीक से ख्याल ही रख पाते हैं। यही कारण है कि हम तरहतरह की बीमारियाेें का शिकार हो रहे हैं।
जब हमारा दिमाग स्वस्थ रहेगा, तभी शरीर भी स्वस्थ रहेगा। कुछ दिमागी कसरतों को करके स्मरण शक्ति तथा तर्क शक्ति को ब़ढाया जा सकता है, साथ ही अपने खानपान पर भी ध्यान देना प़डेगा। तलीभुनी चीजों तथा ज्यादा चिकनाई वाली चीजों का सेवन हानिकारक होता है। इसलिए ऐसे खाद्यपदाथा] के सेवन से बचना होगा। खनिज लवण तथा विटामिनों से भरपूर खाद्यपदाथा] का पर्याप्त मात्रा में सेवन करना चाहिए। ऐसे खाद्य पदार्थ दिमाग व शरीर दोनों के लिए हितकर होते हैं।
ज्यादा तलीभुनी व चिकनाई वाले खाद्य पदार्थों के सेवन से मोटापा ब़ढता है। हाल ही में किये गए एक अध्ययन से ज्ञात हुआ है कि मोटापे के कारण शरीर और दिमाग दोनों को नुकसान पहुंचता है। मोटापे के कारण शरीर में एमीनो एसिड तथा फैटी एसिड की मात्रा ब़ढ जाती जिसके कारण दिमाग को रक्त आपूर्ति करने वाली नसें कमजोर हो जाती हैं। फलों के ज्यादा सेवन से ये नसें कमजोर नहीं होने पाती, इसलिए फलों का ज्यादा से ज्यादा सेवन करना चाहिए।
ब़ीडी सिगरेट के धुएं से भी दिमाग को नुकसान पहुंचता है, इसलिए न तो धूम्रपान करना चाहिए और न धूम्रपान करने वालों के सामने बैठना ही चाहिए। दिमाग को सबसे ज्यादा ऑक्सीजन की जरूरत प़डती है।
जब फेफ़डे स्वस्थ और दुुरुस्त रहेंगे, तभी दिमाग को भरपूर ऑक्सीजन मिल सकती है। फेफ़डों को स्वस्थ और दुरुस्त बनाए रखने के लिए किसी जिम में जाकर व्यायाम करने की जरूरत नहीं है। शारीरिक श्रम करके भी फेफ़डों को स्वस्थ रखा जा सकता है। अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार श्रम करना काफी है, नीचे कुछ व्यायाम प्रस्तुत हैं जिन्हें करके दिमाग को दुरुस्त रखा जा सकता है।
* आंखें बद करके घर का चक्कर लगाएं। ऐसा करते समय ध्यान एकाग्र करना होगा कि घर में कहां, कौन सी चीज है।
* हेयर बैंड या टूथपिक के २०२५ उपयोग सोचेें।
* नाम के अतिरिक्त लोगों की आवाज व गंध भी याद रखने की कोशिश करें।
* वार्डरोब खोलकर कुछ देर तक उसके अंदर की चीजों को ध्यान से देखें। फिर उसे बंद कर दें। अब उसमें रखी चीजों को याद करके उनके नाम एक कागज पर लिखें।
* यदि आप दाएं हाथ से काम करते हैं, तो सुबह बाएं हाथ से मंजन या ब्रश करें। ऐसा करने से बौद्धिक क्षमता ब़ढती है।
* घर के फर्श पर प़डी छोटीछोटी चीजों को पैर से उठाएं। ऐसा दिन में तीनचार बार करें।
* जूते के फीते बांधते समय दैनिक दिनचर्या के २०२५ कामों को याद करें।
* दोनों हाथों का एक साथ उपयोग करें जैसे हवा में गेंद उछालना और पक़डना।
* अपने दफ्तर हमेशा रास्ते बदलबदलकर जाएं।
यदि आप उपरोक्त व्यायामों को नियमित रूप से करेंगे, तब १०१५ दिनों में लाभ महसूस होने लगेगा। यदि दोनों हाथों का एक ही समय अलगअलग उपयोग किया जाए तो लाभ ज्यादा मिलेगा लेकिन ऐसा करना आसान नहीं है, क्योंकि दिमाग एक समय में एक ही कार्य करता है लेकिन द़ृढ निश्चय द्वारा एक ही समय में दिमाग द्वारा दो काम लिये जा सकते हैं।
अपने दोनों हाथों की तर्जनी को सामने रखें। अब एक को घ़डी की दिशा में तथा दूसरी को घ़डी की विपरीत दिशा में घुमाएं। प्रारंभ में तो ऐसा नहीं हो सकेगा लेकिन अभ्यास करते रहने से ऐसा करना संभव हो जाएगा, उपरोक्त व्यायामों को नियमित रूप से करके दिमाग को आसानी से दुरुस्त रखा जा सकता है।
अर्पिता तालुकदार
