नोजवान कुछ नया करके िदखाएगे
युवा श के उदय आर िवकास की से २०१० बहत महवपूण वष होगा। युवा नाम ह नइ ऊजा आर उसाह का, उमीदों आर सपनों का। नया पाधा ही बडा होकर विशाल वक्ष बनता ह, नइ पाध ही वतमान का भविय होती ह। हर दार की युवा पीढी अपनी िपछली पीिढयों से दो कदम आगे होती है । भारत के युवा भी भारत का नया भविय रच रहे है आर नइ सभावनाआें की दुनिया में अपनी जमीन तलाश रहे है । भारत जसे िवकिसत आर वविक फलक पर ताकतवर हो रहे देश के युवाआें की पिछले कुछ वषा] में जसी तिभा उभरकर सामने आइ ह, वह २०१० में हमारी उमीदों को आर भी मजबूत करती है ।
इस वष उमशीलता आर रचनामकता दोनों ही क्षेाें में युवाआें का दखल मजबूत होगा। इीसवीं सदी में पदा हइ पीढी में पुराने लोगों के मुकाबले खतरा उठाने का साहस यादा ह। पहले अमूमन मयमवर्गीय परिवारों में नाकरी का ही आसरा होता था। यही उमीद की जाती थी कि बेटा पढलिखकर कहीं अछी नाकरी में लग जाए। नाकरिया भी यादातर सरकारी ही अछी आर सुरक्षित समझी जाती थीं, लेकिन आज यह िथित काफी हद तक बदली ह आर लगातार बदल रही ह। आज सरकारी नाकरी की बाट जोहने की बजाय युवा ऐसे काम करना चाहते ह, जहा वे तेजी से सफलता की ऊचाइया छू सकें। आज वे सिफ नाकरी पर ही नहीं निभर रहना चाहते। उनमें खतरे उठाने का साहस बढा ह। वे जानते ह कि नाकरी तो कोइ न कोइ मिल ही जाएगी, इसलिए थोडे समय नाकरी करने के बाद वे अपना कोइ काम शु करना चाहते ह। आज महानगरों आर छोटे शहरों में भी युवाआें में यह वा बहत तेजी के साथ बढ रही है ।
फिम इडटी में युवा बेहतरीन आर लीक से हटकर काम कर रहे है । वे ऐसे विषयों पर फिमें बनाने का खतरा उठा रहे ह, जो पहले बिलकुल अछूते विषय माने जाते थे। साहिय, सगीत, सिनेमा, विज्ञान, टेनोलाजी आर बिजनेस में अपने अभिनय योगों आर कपनाशीलता से सफलता की ऊचाइया तय कर रहे ह। यह आज के युवाआें की खासियत ह। यादा नहीं, आज से १५ साल पहले भी यह कपना करना मुकिल था। नइ पीढी के मूयों आर सोच में भी परिवतन आया ह। पहले मातापिता जिससे शादी कर देते, लोग उसी से उम भर के लिए बध जाते थे। आज ऐसा नहीं है । आज बहत बडी सया में लोग अपना जीवनसाथी वय चुन रहे ह। वे जानते ह कि यह जिंदगी का बहुत अहम फसला ह। पूरा जीवन यू ही किसी अनजान य के साथ जुडकर नहीं बिताया जा सकता है ।
आज के युवा लकीर के फकीर नहीं ह। वे किसी बात को सिफ इसलिए नहीं मान लेते कि बडे ऐसा कहते ह। बेशक वे अपने बुजुगा] का समान करते ह, लेकिन बात को मानने से पहले वे अपने विवेक की कसाटी पर परखते ह। जीवन के महवपूण फसले वे खुद लेना चाहते है ।
२०१० युवाआें की उपलधियों के सफर का एक आर पडाव होगा। वे एक कदम आर आगे जाकर नइ रचनामकता के साथ सामने आएगे। फिम, कला आर विज्ञान से लेकर उाेगों तक में नइ चुनातिया उनके सामने होंगी आर वे पहले से भी यादा हिमत व कपना शीलता के साथ उसका मुकाबला करेंगे किसी भी देश का इतिहास युवा पीढी ही रचती ह। भारत के युवा भारत का इतिहास रच रहे है ।
