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साक्षाकार में शारीिरक हावभाव पर िवशेष यान दें

Swatantra Vaartha  Mon, 25 Jan 2010, IST

sakshtra health साक्षाकार में शारीिरक हावभाव पर िवशेष यान दें

यिव िकसी य की सोच, अनुभूित एव यवहार का दपण होता है । कोइ भी य अपने यिव से ही पहचाना आर दूसरे ययाेिं से अलग िकया जाता है । काय करने के ढग, विभि परिथितियों में अभिकिया करने के तरीके, शारीरिक हावभाव आदि से किसी य के यवि का पता चलता है। अपने यवि की वजह से ही कोइ य महान बनता है, तो कोइ सामाय य वियाता होता ह, तो कोइ कुयात। आप अपने यवि को जिस साचे में ढालने की कोशिश करेंगे वह वसा ही आकार लेगा किसी भी य के यवि के बारे में सबसे पहले उसके शारीरिक हावभाव से पता चलता है।

य की शारीरिक भाषा उसके यवि के विषय में बहुत कुछ बया कर देती ह। साक्षाकार कक्ष में वेश करते समय आपको कमर सीधी रखते हए चलना चाहिए आर बठते समय उचित मुा पर यान देना चाहिए। एक मदु मुकान के साथ उचित अभिय आपके यवि को चार चाद लगा सकती ह। साक्षाकार के दारान आपको हसमुख आर आमविवास से लबरेज लगना चाहिए। एक अछा अयर्थी साक्षाकार के दारान एकाग एव दाचाि रहता ह आर साक्षाकार लेने वाले की बात को यानपूवक सुनता ह। एकागचाि से तापय ह सामने वाले य की इछा आर आवयकता के साथ तालमेल बठाना। यदि कोइ य चाहता ह कि दूसरे य के साथ उसकी अतकिया उपादक तथा सूचनाद हो, तो उस समय सुनने की कला को विकसित करना आवयक हो जाती ह। माखिक तथा अमाखिक ‘शारीरिक भाषा’ अभिययाि जब मिल जाती ह, तो अभिय क्षमता बढ जाती ह। दूसरे शदों में, य जो कुछ बोलता ह, उसके साथ उसकी शारीरिक भाषा का उचित सामजय होना चाहिए। यदि अछा सबध थापित करना ह, तो उमीदवार को अपने विभि शारीरिक हावभावों का अनुकूलतम उपयोग करना चाहिए।

साक्षाकार अथवा सामूहिक चचा जसे आपचारिक अवसरों के लिए कुछ वीकत मानक विकसित किये गये ह, जिनका इन अवसरों पर अवय ही पालन किया जाना चाहिए। साक्षाकार की किया के दारान उमीदवार को अपने शारीरिक गतिविधियों ‘जसे हाथपर हिलान आदि’ को जितना सभव हो सके, कम कर लेना चाहिए। हाथों को इधरउधर हिलाना, बारबार बठने की थिति को बदलना, सिर अथवा कधे को बारबार इधरउधर हिलाना, पलकों को जदीजदी ऊपर नीचे करना आर अजीब तरह से मुह बनाना आदि गतिविधिया साक्षाकार लेने वाले य के मन पर अनावयक प से गलत भाव डालती ह। इसी कार की कुछ अय गतिविधिया भी ह, जिन पर विशेष प से यान दिये जाने की जरत ह, जसे दरवाजा खोलते अथवा बद करते समय अनावयक आवाज करना या कुर्सी को खीचते समय चीख जसी आवाज उप होना। इस कार की गतिविधियों से साक्षाकार लेने वाले य पर न केवल विपरीत भाव पडता ह, बकि व चिडिचिडापन भी महसूस करता ह आर उमीदवार के ति उदासीन हो सकता ह। उमीदवार को सीधी अवथा में कुर्सी पर बठना चाहिए, परतु एकदम जड होकर भी नही। जब उमीदवार को अपने बठने की मुा बदलने की इछा हो, तो उसे ऐसे उपयु समय का चयन करना चाहिए, जब उस पर किसी की नजर न हो। अपावधि के साक्षाकार के दारान बठने की मुा बदलने के यास से हमेशा परहेज करना चाहिए।

बठने की सर्वोपयु मुा में उमीदवार को अपने दोनों हाथ बाधकर मेज के नीचे रखने चाहिए, जिससे वह आरामदायक महसूस कर सके। साक्षाकार आरभ होते ही उमीदवार को सामने वाले य ारा पूछे गये न का उार देते समय इधरउधर न देखकर सीधे उसी की तरफ देखना चाहिए। इससे आमविवास दशित होता ह। ह। इधरउधर देखने में ऐसा लगता ह कि अयर्थी असहज महसूस कर रहा ह आर अपने डर तथा बेचनी को छुपाने का यास कर रहा ह। अपनी बात को भावशाली तरीके से तुत करने के लिए उमीदवार अपनी शारीरिक भाषा का इतेमाल कर सकता ह। साक्षाकार लेेने वाले य का यान अपनी ओर आकषित करने के लिए अयर्थी बोलते हए अपने सिर, हाथों आदि का उपयु एव भावशाली तरीके से इतेमाल कर सकते ह। इस कला में माहिर होने के लिए अयर्थी नियमित प से तिदिन समाचार वाचकों के हावभाव तथा मुाआें का अवलोकन कर सकते ह।

साक्षाकार से सबधित निनलिखित न वय से पूछिए। इनके उार साक्षाकार से सबधित आपकी सभी आशकाआें का समाधान कर आपके आमविवास में व करने में सहायक सि हो सकते ह।

या आप साक्षाकार के दारान साक्षाकार लेने वाले य से सीधा सपक थापित करते ह? या आप साक्षाकार लेने वाले य के दाएबाए या आगेपीछे देखते ह? कुर्सी पर बठकर आप जड तो नहीं हो जाते ह? या आप अपने सिर तथा हाथों को हिलाते ह? या आप वय को ही अभिय कर रहे ह या कमिता दशित कर रहे ह? या आप सहज एव वाभाविक महसूस करते ह?

यदि आपकी शारीरिक भाषा एकदम अलग कार का सकेत देती ह, तो चाहे आपने कितनी भी दक्षता के साथ अपना जीवनवा तयार यों न किया हो या सभी कठिन नों का भी सही जवाब यों न दिया हो, साक्षाकार की बाधा को पार करना आसान नहीं होगा। विभि शोधों से ये निकष निकाले गये ह कि सेषण के दारान आवाज का लहजे आर शारीरिक भाषा का ६५ तिशत योगदान होता ह। शदों का योगदान मा ३५ तिशत तक होता ह।

शारीरिक भाषा से हमारी भावनाए आर सोचविचार काफी हद तक परिलक्षित हो सकते ह, चाहे हम कुछ बोल पा रहे हों या नहीं। अपने कायकलापों के बारे में सजग न रहने से हमें घबराहट तथा बोरियत महसूस होती ह आर दिमाग में नकारामक विचार पदा होने लगते ह। इसका परिणाम घातक सि हो सकता ह।

शारीरिक भाषा से सबधित कुछ महवपूण सकेत इस कार ह घबराहट में इधरउधर हाथपर मारना या हिलाना बेचनी का सूचक ह।

एक अछा जीवनवा आर साक्षाकार में सभी कठिन नों के सही उार भी अछा भाव नहीं छोड पायेंगे, यदि आपकी आवाज प न हो। वय को प, नियति एव सतत आवाज में विवासपूण तरीके से तुत करना अति महवपूण ह। इसका अयास करने के लिए समय लगायें आर यहा तक कि अपने माेिं के साथ छ साक्षाकार आयोजित करें। इस सबध में निनलिखित बातों का यान आवयक ह।

सयमित लहजे में प प से अपनी बात कहें, आवयकतानुसार लहजे में परिवतन करे तथा एक रसता से बचें। बोलने से पहले थोडा विराम ले, एकदम बोलने से गलतिया होने की सभावना रहती ह।

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