
ऐसे तय करें अपना भिवष्य
हर आदमी जीवन में कुुछ न कुछ बनना चाहता है। डाटर , इजीनियर, पकार, टीवी /फिम कलाकार, चिकार , फोटोगाफर कारपेंटर या आर कुछ। टूडेंटस को आठवीं में ही इस पर यह सोचना शु कर देना चाहिए कि उहें या बनना है, योंिक जब आप यह तय कर लेंगे कि या बनना ह, तो फिर वह बनना भी आसान हो जाएगा।
उदाहरण के लिए हमें अगर पकार बनना ह, तो हम पपकािआें में छपे समाचारों को यान से पढने लगेंगे। उसमें चि होगी तो अययन से हम बहत जद यह जान जाएगे कि किस विषय का समाचार कसे आम तार पर लिखा जाता ह। समाचारों के सूम अययन आर चिंतन से हमारा आधा काम तो बन ही जाएगा, योंकि समाचार लिखने की शली काफी हद तक हमारी समझ में आ गयी होगी । हम समाचार लिखने का अयास कर सकेंगे।
किसी योय पकार को अपना लिखा दिखाकर यह जान सकेंगे कि हमने कितना सही लिखा ह, कितना गलत। इस सबका मतलब यह हआ कि हममें पकारिता की चि पदा हो गयी ह। अब किसी पपकाि से पकार के प में कसे जुडना ह, इसकी आगे खोजबीन आर यास किए जाएगे। हमने ारभिक काम कर लिया। इस जबे को, चि को, लय को बनाए रखा गया तो आपको वह बनने से कोइ नहीं रोक सकता जो आप बनना चाहते ह।
तो सबसे पहले यह करना जरी ह कि हम यह तय करें कि हमें बनना या ह ? जब आप यह तय कर लेंगे तब न होगा कि वह बनने के लिए करना या होगा ? सबसे पहले जो बनना तय किया ह, उसी में चि लें आर पूण चि लेें। यह चि आगे के राते तलाशेगी। अपना लक्षित काम कसे बनाना ह, इसके जुगाड ढूढेगी।
या बनना ह यह तय करने के लिए कभी अलग से घटेदो घटे का समय निकालिए। एकात में चले जाइये कापी पेन लेकर। अपनी या जिस पर आश्रित ह उनकी आथिक थिति पर विचार करिए। आज की ही नहीं, भविय की भी। उस अथयवथा में आपको अधिकतम आर यूनतम कितना नगद मिल सकता ह आपको। यूनतम मोटा अदाजा लगाए।
अब सोचे आपको या बनना सबसे अछा लगता ह? उदाहरण के लिए आपकी यवथा ५० हजार की हो सकती ह, तो हिसाब लगाए कि आप जो बनना चाहते ह, या वह ५० हजार की रकम में बनना सभव ह? अगर सभव ह, तो अछा ह आर अपना निणय अपने अभिभावकों आर माेिं को बताकर आप उनकी राय ले सकते ह। यह कापी में नोट करें। अगर रकम कम पड रही ह, तो भी इस विषय पर चचा करे हो सकता ह बातचीत से कोइ बात बन जाए, कापी में नोट कर लें।
अगर सभावना बिकुल नजर न आती हो, तो आप अपने पसद के दूसरे नबर के काम के बारे में सोचें। जसे हम बनना तो चाहते ह इजीनियर मगर थिति यह ह लगती ह कारपेंटर बनना ही सभव ह। तो हमें कम से कम कोइ आसान विकप चुन लेना चाहिए।
हर काम के लिए पहले से सोचने वाले आर फिर उस पर निरतर काम करने वाले ही सफल होते ह। अगर आपको ‘बाडी’ बनानी ह, तो आपके समक्ष उेय प होना चाहिए। फिर ही हम उसके अनुप खानपान में बदलाव आर यायाम कर पाएगे। जब आप उेय तय कर लें, तो कापी में नोट कर लें।
अपना उेय साधने के काम में लग जाए। उस विषय के जानकार लोगों से पहचान बढाए, उनसे सफलता के गुर पूछें। कहा से या जुगाड बन सकता ह यह जानकारी जुटाए । अपनी आमदनी कसे बढाए । यह सोचे। कुछ काम पढाइ करते हए भी सीखे जा सकते ह। कुछ कमाइ पढतेपढते भी की जा सकती ह। जसे अगर आप हाइकूल के टूडेंट ह तो आप आठवी वालों को टूशन पढा सकते ह।
आजकल तो अधिकतर लोग चाथी पाचवी लास के बों को भी टयूशन पढवाते ह। तो टयूशन ढूढें। पाटटाइम कयूटर टाइपिंग, डिजाइनिंग, फोटोगाफी, चिकारी, बढइगिरी, दर्जीगिरी या अय बहत से काम सीखे जा सकते ह। पुराने जमाने का दुनिया का जानामाना अमीर हनरी फोड अपने बों को कूल से लाटने के बाद आमदनी के लिए बूट पालिश करने बाजार में भेज दिया करता था, इसलिए कि बों को कमाने की, मेहनत करने की आदत पडे। बूट पालिश कर कमाइ करना न तब अछा समझा जाता था, न आज समझा जाता ह, लेकिन हेनरी फोड जानते थे कि छोटे बे वही एक काम कुशलतापूवक कर सकते ह।
हमारा मतलब यह नहीं कि आप भी आमदनी के लिए जूते पालिश करें। कोइ भी समानजनक काम किया जा सकता ह।
उेय साधन में होने वाली गति को नोट करते जाए, आगे लय तय करते जाए। बाधाए आए तो परेशान न हो। उनकी काट ढूढें। अपनी कमियों पर चिंतन करें आर उनमें सुधार करें । यास निरतर जारी रहे। निराश न हों। उेय सि के लिए कभी परेशान न हों,तनाव न पाले। यास जारी रखें। देर से ही सही काम बन जाएगा।
इस तरह की मानसिकता बन जाएगी आर लय में चि आगे बढने की आदत पड जाएगी तो आप पाएगे कि राह आसान ह। परिथितिया आपके अनुकूल ह। तो आज से ही अपना लय निधारित कर सकारामक मानसिकता बना लें। आप निचित ही सफल होंगे।
