बायो इफारमेिटस में है रोजगार के अछे अवसर
बायो इफारमेिटस एक नइ तथा जव ााेगिकी की उभरती हइ शाखा ह। सवविदित ह कि पिछले दो दशकों में वज्ञानिक जगत के जीव विज्ञान तथा कयूटेशन साइस क्षेाें में अभूतपूव सफलता ा हइ ह। बायो टनोलाजी तथा कयूटर साइस दोनों का ही बडी तीव गति से वितार हआ ह। ऐसा तीत होता ह कि भविय में ये दोनों क्षे आम इसान की जिंदगी के अभि अग होगे।
हेथ केयर, आषधि उपादन, खाा एव कषि उपादों के विकास, ऊजा, पयावरण सरक्षण इयादि महवपूण क्षेाें में बायो टनोलाजी की दिनपतिदिन बढती भूमिका के मेनजर समूचे विव में अनुसधान एव विकास काय युतर पर चल रहा ह। पिछले कुछ वषा] में यह एक सपूण वज्ञानिक सकाय के प में उभरकर सामने आया ह। बहद पमाने पर हो रहे शोध काया] के फलवप ‘ानटेटिव डाटा’ में अचानक व के कारण जव विज्ञानियों के समक्ष इन डाटा का सगहण, भडारण, वितरण तथा इस तक पहच एक चुनाती साबित हो रही ह। इन बहमूय वज्ञानिक डाटा के समुचित बधन हेतु कयूटर साइस, इफारमेशन साइस तथा इफारमेशन टनोलाजी का ज्ञान अति आवयक ह। इनकी मदद से जीव विज्ञान की जटिल समयाआें का समाधान किया जा रहा ह।
आइटीआर विशेषत इटरनेट का सतत बढते हए डाटा को जमा करने, वितरित करने तथा उस तक पहचने के लिए उपयोग हो रहा ह। इन ा डाटा का मथेमेटिस एव टटिटिस आधारित टूस की सहायता से विलेषण किया जाता ह आर इस जटिल काय को सपादित करने हेतु य विशेष को जीव विज्ञान के अलावा कयूटेशनल साइस में भी निपुण होना चाहिए, जो न केवल उ कार्यो को कुशलतापूवक सपादित करे बकि आवयकतानुसार साटवेयर का विकास करने मे भी सक्षम हो।
बायो इफारमेटिस, जो एक नवोदित वज्ञानिक शिक्षा क्षे ह, इसी जरत को पूरा करता ह। इसके अतगत जीव विज्ञान, गणित, टटिटिस, बायोलाजिकल कमिटी, जेनेटिक इफारमेशन, लो एड ाेसेसिंग, कयूटिंग तथा कयूटर ाेगामिंग, डाटा बेस सिटम इयादि की बुनियादी शिक्षा दान की जाती ह। बायो इफारमेटिस में रोजगार के अछे अवसर दिखाइ पड रहे ह। जव ााेगिकी के उसाहवթक परिणाम ने सारी दुनिया के यावसायिक तािनों तथा उमियों का यान अपनी ओर आकषित किया ह।
ऐसा माना जा रहा ह कि २१ वी सदी में जव ााेगिकी तथा इससे सब ाेफेशनस ही राज करेगे। भारत में भी इस क्षे में यवसायिक कियाकलाप आरभ हो चुका ह। सरकार इस क्षे में पूजी निवेश को ाेसाहित कर रही ह। रोजगार के अछे अवसर को देखते हए विभि सथानों में बायो इफारमेटिस शिक्षणशिक्षण की समुचित यवथा भी आरभ हो गइ ह। भारत सरकार के जव ााेगिकी विभाग ने १९८७८८ में ही देश के कुल ९ विववािलयों में बायो इफारमेटिस के की थापना की थी। पुणे विववािलय में १९९७९८ से बायो इफारमेटिस में डिलोमा पाठकम चल रहा ह। इसी विववािलय में अब बायो इफारमेटिस में दो वर्षीय एमएस सी पाठकम भी चल रहा ह।
इटीटयूट आफ बायो इफारमेटिस एड एलाइड बायो टनोलाजी, बगलार ारा बायो इफारमेटिस में पोट गेजुएट कायकम सचालित किया जा रहा ह।
मदुर कामराज विववािलय ारा भी बायो इफारमेटिस में एमएससी पाठकम सचालित किया जाता ह।
पूणकालिक पोट गेजुएट ाेगाम के अतिरि ाेफेशनस के काशल उयन के लिए भी विभि सथानों ारा बायो इफारमेटिस में ‘शाट टम’ कोस आयोजित किए जाते ह।
भारत सरकार के ‘माल इडटीज सविस इटीटयूट’, चेइ ारा ६ मास की अवधि का पोट गेजुएट डिलोमा इन बायो इफारमेटिस का कोस सचालित किया जा रहा ह। इसके अलावा कुछ निजी सथान भी बायो इफारमेटिस में पीजी कोस सचालित कर रहे ह।
बायो इफारमेटिस में पोट गेजुएट कोर्सेज के लिए सामायत वेश हेतु बायो कमिटी, बायोलाजी, बाटनी, कमिटी, इलटानिस, इवायरनमेंटल साइस, जेनेटिस, लाइफ साइस, मस, माइकोबायोलाजी, फिजिस, जूलोजी, एगीकचर, कयूटर, इजीनियरिग, मेडिसन, फामायुटिकल, वेटरनरी साइस इयादि विषयों के साथ नातक उपाधि ा अयर्थी योय माने जाते ह। वेश हेतु वेश परीक्षा ाय जूनजुलाइ में आयोजित की जाती ह, जिनकी सूचना विभि समाचारपों में काशित होती ह।
