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हर िदल अजीज िदल खुश बनें

Swatantra Vaartha  Mon, 1 Feb 2010, IST

heart aziz make enjoy

हर िदल अजीज िदल खुश बनें

आपके मन में आता ह, कहा से आ टपका यार ! या कभी सामने वाले को देखकर आपके दिमाग का पारा सातवें आसमान पर जा पहचता ह। कुछ लोगों को सामने पाकर आपके दिल को एक सुकून भी पहचता होगा। आखिर ऐसा यों होता ह कि कोइ हमें अछा लगता ह तो कोइ बुरा ? आप भी किसी को अछे लग सकते ह या किसी को आपको देखकर नाकभाह सिकोडने की इछा होती होगी। यू न ऐसा कुछ करें कि आप दूसरों के दिलों में अपने लिए जगह बना लें। आपको बस वय को कुछ मापदडों पर कसकर थोडा बदलना ह।

हसता हआ नूरानी चेहरा

हसता, मुकुराता चेहरा सता का अहसास वय के साथसाथ सामने वाले को भी कराता ह। चेहरा पर मायूसी की परत न जमने दें। घडी में दस बजकर दस मिनट की तरह मुकान रखें, न कि साढे पाच बजे की तरह मुह लटकाए रखें।

एक मुलाकात जोश भरी

जब आप पहली बार किसी से मिल रहे हों तो मुलाकात में गमजोशी हो, उसाह हो, ऐसा लगे कि उसी य से मिलने को आतुर थे। मुलाकात में ठडापन न हो।

आपका नाम!

जिससे भी मिले उसका नाम जर याद रखें। भले ही कहावत हो कि नाम में या रखा ह, मगर जब आप भीड में किसी य को उसके नाम से पुकारते ह तो वह आपका मुरीद हो जाता ह।

वाह, आपका तो जवाब नहीं

अछी वतु हो या य, उसकी शसा की जानी चाहिए। झूठी तारीफ न करें। झूठी शसा कर भले ही उस य की निगाह में आप आ जाए, मगर आपको लोग चापलूस या झूठा कहेंगे।

मने तो ऐसा कहा था

आपको इस बात का इम होना चाहिए कि आप या कह रहे ह। अपनी बात पूरी शित के साथ वितार से कहें आर सही ढग से कहें। ऐसा न हो कि आप वह बात कहना ही भूल जाए जो कहना चाह रहे थे जो आप कह रहे हों, उसका मतलब ही वह न निकले जो आप कहना चाह रहे हों।

सुनिए तो

केवल वय ही कहते न जाए, सामने वाले की भी सुनें। आप जो कहना चाह रहे ह हो सकता ह उसी के सदभ में सामने वाला य ऐसी कोइ जानकारी आपको मुहया करा दे जो आपके काम की हो। ऐसा तब होगा जब आप उसे सुनेंगे।

बुमािन छलकी न जाए

कुछ लोग वय को बुमािन आर सामने वाले को मूख समझते ह। ऐसा कभी न करें। यदि आप कुछ कह रहे ह तो उसकी वीकारो ऐसे न कराएआइ बात समझ में, या समझे या ? रहने दो ये तुहारी समझ से बाहर ह ? ऐसा कहकर आप सामने वाले के मन को आहत कर रहे होते ह।

ताना न मारें

कुछ लोगों की आदत होती ह, वे बातोंबातों में यय या ताना मार देते ह। ऐसा न करें। याल रखें तीर या तलवार का जम भर जाता ह, मगर शदों की चोट जिंदगी भर टीसती ह। अगर आप किसी पर ताना कसेंगे तो माका मिलते ही वह भी आप पर यय बाण चलाएगा।

तक करें, बहस नहीं

अपनी बात कहने के लिए अपने तक तुत करें, न कि सामने वाले से बहस करें। इससे आपकी छवि धूमिल होती ह। बहस कर अपनी बात जबरन मनवाने की जगह दूसरों के तक भी सुनें। सभव ह वह सही हो।

घडी देखी आपने ?

अपनी बात को सही ढग से सही समय पर कहें तो वह यादा असर छोडती ह। किसी के आफिस जाने का समय हो रहा हआर आप पहच गए अपनी बात कहने। वह भी सुनीअनसुनी कर देगा। ऐसी थितियों से बचें।

खुशी या जलन ?

किसी की उपलधि पर खुशी जाहिर कीजिए, उससे जले नहीं। इया से वय का नुकसान होता ह, सामने वाले का नहीं। सफलता पर सता जाहिर करने का मतलब ह कि आप उसके यासों की सराहना कर रहे ह।

धयवाद/वागत कहना सीखें :

ये वे शद ह जो जादू करते ह। ऐसा जादू जिहें आप भी नहीं जानते। यकीन न आए तो आजमाकर देख लें। किसी का शालीनता से, सयता से, आमीयता से वागत करें, किसी ने आपके लिए कुछ किया ह तो धयवाद कह दें, वह आपका मुरीद हो जाएगा। हा, अगर आपने धयवाद या शुकिया ऐसे कहा जसे उसके सिर पर हथाडा मार दिया हो, तो इन शदों का कोइ अथ नहीं रह जाता।

दुख के सहभागी बनें :

दूसरों पर अचानक आइ विपदा या दुख के समय उसमें सहभागी बनें, सावना दें। सुख में न सही, दुख के समय सहभागी बनें। ऐसे समय में आपकी उपथिति एक अथ में सामने वाले को ढाढस बधाती ह।

महवकाक्षा पालें, तनाव नहीं :

जिंदगी में किसी एक लय की पा हेतु महवाकाक्षी होना अछी बात ह, मगर उसके लिए हरदम तनावयु रहना अछा नहीं ह। तनावगत रहने से दिमाग में भटकाव पदा होता ह, क्षमताए बिगडती ह, जीवन अतयत होता ह। आप अपने यवि को नुकसान पहचाते ह, अत तनाव को फटकने नहीं दे आर जिंदगी में हमेशा सकारामक रवया अपनाए।

पूवागह से पीडित न रहें:

अपने दिमाग में पूवागह को घर न बनाने दें। चाहे वह दूसरों के ति हो या अपने ति। मेरे से यह नहीं होगा या म नहीं कर सकता जसे अनेक पूवागह दिमाग में अपने लिए आर दूसरे के बारे में जसे वह तो ह ही ऐसा, नहीं पालें। पहले मिलें आर फिर राय बनाए।

गलती वीकारें :

अपनी गलती वीकार करने में शम महसूस न करें। गलती इसान से ही होती ह। आप गलत ह तो तुरत बेहिचक वीकार करें। गलती छिपाकर हम गलतियों पर गलतिया करते जाएगे।

अछी किताबें पढें:

बुरा व सब पर आता ह, इस समय में जब सब आपका साथ छोड देते ह, तब किताबें सबसे अछी दोत साबित होती ह। उनका साथ न छोडें। यही आपको राह दिखाती ह।

सीखने की ललक भी रखें:

जीवन गतिशील ह। हमेशा सीखने की ललक रखें। चाहे अपने से छोटे य से ही सीखना पडे।सीखें, जीवन में ठहराव न आने दें। गति ही गति का कारण ह, अत सीखें।

ऐसे एक नहीं अनेक छोटेछोटे कारण ह जो आपके यवि में चार चाद लगा सकते ह।

मसलन दूसरों को नीचा न दिखाए, उसकी ताहीन न करें, भाय का रोना न रोए आदि। आप चाहते ह कि लोगों के दिल में आपके लिए जगह बने तो यह आप पर निभर ह।

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