बनाए रखें आत्मविश्वास
परीक्षा एक ऐसा नाम है जो अच्छोंअच्छों को डरा देता है। ‘परीक्षा’ विद्यार्थी के लिए एक कसौटी होती है जब उसके साल भर के अध्ययन और परिश्रम को जांचा जाता है। इस जांच के सीधेसीधे दो पैमाने हैं। उत्तीर्ण या अनुत्तीर्ण। उत्तीर्ण तो ठीक है, पर अनुत्तीर्ण का अर्थ है साथियों, परिवार, समाज, विद्यालय, शिक्षकों और प्रतिद्वंद्वियों की नजरों में गिरना। यह ‘गिरने’ की आशंका एक तनाव पैदा करती है और कई बार तो सारा आत्मविश्वास ही डगमगा जाता है। एक डर, एक तनाव व एक आशंका परीक्षार्थी को दहशत में डाल देती है। यही तो है ‘एग्जाम फीवर’ यानी ‘परीक्षा ज्वर।’
फरवरी और मार्च महीने में जब वसंत का सुहावना मौसम होता है तब परीक्षा का भय तनमन दोनों को बीमार कर देता है। सारा उल्लास व सारी उमंग खत्म हो जाती है। न खेल भाता है न तमाशे। न मित्र मंडली के साथ कहकहे लगाने को मन करता है और न ही टीवी या सिनेमा हॉल में मनोरंजन कर पाते हैं। ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि परीक्षा को लेकर सारा आत्मविश्वास डगमगा जाता है और आत्मविश्वास डगमगाने का मतलब है हौसला खो बैठना।
यूं तो भविष्य निर्माण के प्रति सजग बच्चे वर्ष भर प़ढतेलिखते रहते ही हैं मगर परीक्षा का तनाव उनके लिए भी एक संक्रमण काल की तरह आता है। यह वही समय होता है जब परीक्षा के तनाव व दबाव के चलते लगभग सभी बच्चे घबराहट का अनुभव करते हैं, उनकी भूख कम हो जाती है और अनिद्रा के साथसाथ सरदर्द एवं आंखों में थकान या दर्द की शिकायत भी प्रायः सुनने देखने में आती है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों से प्राप्त आंक़डे दर्शाते हैं कि इन दोतीन महीनों में मनोविश्लेषकों का कार्यभार भी ब़ढ जाता है। इतनी मेहनतमशक्कत के बाद भी यदि परीक्षा में अच्छे अंक न आयें तो किरकिरी तो होती है, बच्चे डिप्रेशन अथवा हताशा का शिकार भी हो बैठते हैं जिससे उनमें व्यक्तित्व संबंधी दोष भी पैदा हो जाते हैं। कम अंक अथवा प्रत्याशा के अनुरूप अंक अथवा ग्रेड न मिल पाने पर बहुत से बच्चे तो प्रतिवर्ष आत्महत्या तक कर बैठते हैं।
वस्तुतः गौर से देखें तो हमारी शैक्षिक एवं शिक्षण प्रणाली की ब़डी भारी असफलता एवं कमी यह है कि भविष्य के लिए तैयार करने की बजाए यह भविष्य में जीने का हक ही छीन लेती है। हमारी सामाजिक संरचना, मांबाप का सोशल स्टेटस, अकादमिक अंकों अथवा ग्रेडों के आधार पर नौकरी, सेलेक्शन अथवा बुद्धिमान समझे जाने की प्रवृत्ति के चलते परीक्षा एक कसौटी न बनकर एक हौवा बन गई है, जीवनमरण का प्रश्न हो गई है।
खैर परीक्षा या शिक्षा में जो दोष हैं, सो हैं मगर हमें इसी संरचना व समाज में रहना है, सो परीक्षा का सामना करने की हिम्मत व क्षमता तथा कुशलता प्राप्त कर लेना ही बुद्धिमानी है। स्वास्थ्य जगत का नियम हैं कि उपचार से सावधानी भली, तो आइए देखें कैसे पार कर सकते हैं परीक्षा वैतरणी में सफलता अच्छे अंकों के साथ।
सबसे पहले तो परीक्षा के नाम पर होने वाली घबराहट पर नियंत्रण पाना जरूरी है, क्योंकि घबराने से कोई काम सिद्ध नहीं होता। एक बार घबराहट पर काबू पा लेने से आधी समस्या तो वैसे ही हल हो जाती है यों भी जब आपने वर्ष भर मेहनतपूर्वक अध्ययन किया है, तो डर या घबराहट क्यों? यदि तैयारी में कहीं कमी भी लगती है, तो भी इसका समाधान घबराहट नहीं वरन् मनोयोगपूर्वक अध्ययन कर अपनी कमी दूर करना है।
और हां, खानापीना छ़ोडने से आपकी अध्ययन क्षमता पर प्रतिकूल असर ही प़डता है अतः खानापीना छ़ोडने की बजाए संतुलित एवं पौष्टिक आहार अवश्य लेते रहें। इस अवधि में आंवला, बादाम तो अवश्य ही लें और दूध भी पिएं। हो सके तो जूस लेते रहें। हां, चटपटे एवं फास्ट फूड से बचे रहें तो पेट भी अध्ययन में साथ देगा।
प़ढने का अपना अलग कमरा व टाईमटेबल होना भी जरूरी है। समयबद्ध व नियमित अध्ययन से आत्मविश्वास ब़ढता है और आत्मविश्वास तो सफलता की कुंजी है। असली आत्मविश्वास आता है पाठ्यक्रम के गहन एवं सम्पूर्ण अध्ययन से । यथासंभव पूरा पाठ्यक्रम प़ढें तथा अच्छे अंक या ग्रेड लेने के लिए बाजारू नोट्स, कुंजियां या सेलेक्टेड क्वेश्चन्स आदि से बचें। यदि अच्छे अंक पाने हैं, तो पाठ्यक्रम का कोई भी अंश अनछुआ न छ़ोडें।
परीक्षा की तैयारी रटकर नहीं वरना लिखकर एवं तर्कशक्ति के साथ करें। अपने प्रत्येक प्रश्नपत्र के स्वरूप, अंकों के विभाजन, प्रश्नों की संख्या, प्रत्येक प्रश्न की शब्द सीमा आदि का भी ज्ञान होना आवश्यक है। इससे भी अच्छे परीक्षा परिणाम पाने में मदद मिलेगी।
ये तो रही चंद बातें परीक्षापूर्व तैयारी की। अब परीक्षा भवन में कैसे हल करें प्रश्न पत्र? यही तो महत्पपूर्ण है। सबसे पहले तो उत्तर लिखने से पूर्व प्रश्न अच्छी प्रकार समझ लें। उत्तर सटीक एवं निर्धारित शब्द सीमा में ही लिखें। अनावश्यक विस्तार न दें और न ही अति संक्षिप्त करें! उत्तर संतुलित एवं पूछे गए प्रश्न के अनुरूप ही होना चाहिए।
यदि प्रश्नपत्र को अलग से दी गई उत्तर पुस्तिका पर हल करना है, तो उत्तर क्रमवार लिखें। प्रत्येक उत्तर के आगे संबंधित प्रश्न की क्रमसंख्या अंकित करें तथा एक खंंंंड के प्रश्न एक ही जगह लिखें। हर प्रश्न के पश्चात् एक या दो लाईन अवश्य छ़ोडें। लिखने से पहले सोचें! काटछांट से यथा संभव बचें और हां, अपने उत्तर पर पूर्ण विश्वास रखें! पास बैठे परीक्षार्थी से पूछना गलत तो है ही उसका उत्तर सही हो, उसकी भी कोई गारंटी नहीं है।
एक बार फिर याद रखें कि आत्मविश्वास सफलता की सबसे ब़डी कुंजी है। इन सबसे ब़ढकर आपकी लिखावट का स्पष्ट एवं सुन्दर होना तो बहुत ही जरूरी है। प्रश्नपत्र हल करते हुए समय का भी पूरा ध्यान रखकर चलें और अंत में यदि पूरक कॉपी ली है, तो उसे परीक्षा भवन छ़ोडने से पूर्व अच्छी प्रकार नत्थी जरूर करें।
