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युवाआें को प्रोत्साहित करने के लिए उपयोगी योजनाएं

Swatantra Vaartha  Mon, 8 Feb 2010, IST

Young Generation, युवाआें को प्रोत्साहित करने के लिए उपयोगी योजनाएं

विज्ञान की प़ढाई करने वाले युवाआें के लिए इंजीनियरिंग, मेडिकल या आईटी प्रोफेशनल बनने का ही एकमात्र प्रोफेशनल लक्ष्य होता है। यह ख्वाब अभिभावकों, सहपाठियों और अध्यापकों द्वारा प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से उनके मन में कूटकूटकर भर दिया जाता है। इस सोच के प्रति युवाआें का आननफानन में आकर्षित होने का सबसे ब़डा कारण शायद सुरक्षित भविष्य तथा मोटा पेपैकेज ले पाने की अपनी दिली इच्छा भी होती है। व्यावहारिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो इस सोच अथवा फैसले को भी गलत नहीं ठहराया जा सकता है। ऐसे में समस्त ज्ञान अर्जन एवं पाठ्‌यक्रम पूर्णतः प्रतियोगी परीक्षाआें की तैयारी तथा इस गहन प्रतिस्पर्द्धा में अन्य प्रतिद्वंद्धी छात्रों को पछ़ाडने पर केन्द्रित होकर रह जाता है।

लेकिन देश को सिर्फ इंजीनियरों और डॉक्टरों की ही जरूरत नहीं है। चहुंमुखी विकास के लक्ष्य को पाने, सामाजिक उत्थान तथा अर्थव्यवस्था को सुद़ृढ बनाने में अन्य प्रोफेशनलों और वैज्ञानिकों का भी कम योगदान नहीं है। देश में ऐसी विलक्षण बुद्धि वाले युवाआें की कमी नहीं है, जो विज्ञान की अनोखी दुनिया के रहस्यों की परत दर परत खोलने की चाह रखते हैं। उनकी इस प्रतिभा का लाभ समूचे मानव समाज और हमारी सभ्यता को मिल सकता है बशर्ते कि उन्हें इच्छित दिशा में जाने का मौका मिले, जिनमें स्कूल परीक्षाआें में अंक बटोरना और फिर प्रतियोगी परीक्षाआें की बाधा को पार कर प्रोफेशनल कोर्स में दाखिला हासिल करने तक की सीमित चाह न हो।

ऐसे युवाआें को आगे ब़ढने के लिए प्रोत्साहित करने तथा वैज्ञानिक अनुसंधानों और शोध की दुनिया में कुछ करके दिखाने हेतु सरकारी और निजी क्षेत्र की ओर से तमाम तरह की योजनाएं, कार्यक्रमों, पाठ्‌यक्रमों और प्रतियोगी परीक्षाआें का स्कूली और विश्वविद्यालय स्तर पर अखिल भारतीय रूप से आयोजन किया जाता है। प्रायः इनके बारे में ज्यादा प्रचारप्रसार न होने तथा प्रोफे शनल पाठ्‌यक्रमों की चमक के आगे ये आंखों से ओझल हो जाते हैं। यही कारण है कि विज्ञान की प़ढाई करने वाले युवाआें का बहुत ब़डा वर्ग अपनी कैरियर प्राथमिकता सूची में वैज्ञानिक बनने का उल्लेख भी नहीं करता है। निसंदेह यह विज्ञान, विकास और वैज्ञानिक सोच को अवरुद्ध करने वाली स्थिति है। इस बारे में नीति निर्धारकों तथा शिक्षाविदों को मनन करना प़डेगा ताकि इस प्रकार के रुझान को समय रहते रोका जा सके।

जो ठोस विज्ञान एवं इसके सैद्धांतिक पहलुआें पर काम करना चाहते हैं, उनके लिए बहुत अवसर हैं। आज सरकारी संस्थानों और उनके द्वारा संचालित ऐसे कार्यक्रम हैं, जिनके सहारे किशोर या युवा न सिर्फ अपने कैरियर की दिशा को समय रहते तय कर सकते हैं, बल्कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के विकास में सकारात्मक योगदान भी दे सकते हैं। प्रस्तुत है उपयोगी योजनाआें की जानकारीः

नेशनल टैलेंट सर्च एग्जामिनेशन

इसका आयोजन नेशनल काउंसिल फॉर एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (एनसीईआरटी), मानव संसाधन विकास मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा किया जाता है। इस परीक्षा का उद्देश्य स्कूली स्तर पर प्रतिभावान छात्रों का चयन करना और उन्हें प्रोत्साहित करने के लिए स्कॉलरशिप प्रदान करना है। इस अखिल भारतीय स्तर की परीक्षा का आयोजन दो स्तर पर किया जाता है। प्रथम स्तर पर ८वीं कक्षा में प़ढने वाले छात्रों के लिए तथा द्वितीय स्तर पर १०वीं कक्षा के छात्रों के लिए। ८वीं स्तर की एनटीएस परीक्षा का प्रांत स्तर पर आयोजन किया जाता है जबकि १०वीं स्तर की इस परीक्षा का राष्ट्रीय स्तर पर संचालन किया जाता है। इस परीक्षा में मेंटल एबिलिटी टेस्ट के अलावा स्कॉलिस्टिक एप्टीट्‌यूड टेस्ट पर आधारित पेपर होते हैं।

किशोर वैज्ञानिक प्रोत्साहन योजना

इस परीक्षा में सीनियर सैकेंडरी स्तर पर अध्ययनरत अथवा ग्रेजुएशन पाठ्‌यक्रमों में प़ढने वाले युवा शामिल हो सकते हैं। इस परीक्षा में रिसर्च एप्टीट्‌यूड रखनेे वाले युवाआें का प्रतियोगी परीक्षा के प्रश्नाेें के विशेष स्वरूप की कसौटी पर चयन किया जाता है। इसकी शुरुआत १९९९ में विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार द्वारा की गई थी। इसकी तरह इंजीनियरिंग, मेडिकल अथवा अन्य विज्ञान आधारित प्रोफेशनल कोर्स में अध्ययनरत युवाआें को इन्हीं विषयों में रिसर्च कैरियर अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। इस प्रतियोगी परीक्षा में सफल होने वाले छात्रों को पीएचडी से पहले तक स्कॉलरशिप देने का प्रावधान है। अधिक जानकारी के लिए इंडियन इंस्टीट्‌यूट ऑफ साइंस, बेंगलुरू की वेबसाइट ुुुळळीलशीपशींळप देखी जा सकती है।

नेशनल स्टैंडर्ड एग्जामिनेशन (फिजिक्स, केमिस्ट्री, बायोलॉजी तथा एस्ट्रोनॉमी)

ये चारों विषयों की अलगअलग परीक्षाएं हैं। प्रारंभ में इसकी संलग्नता किसी प्रकार के दाखिलों, स्कॉलरशिप तथा रोजगार से नहीं थी। इनका उद्देश्य सिर्फ छात्रों की उक्त विषय में हासिल की गई प्रवीणता का सही आकलन कर नतीजे प्रस्तुत करना था लेकिन अब इस दाखिले, रोजगार तथा छात्रवृत्ति से संबंद्ध कर दिया गया है ताकि युवा इसके प्रति अधिक आकर्षित हों। अब इन परीक्षाआें का संबंध नेशनल, एशियन तथा इंटरनेशनल ओलम्पियाड से भी है। इनका आयोजन नवम्बर माह में होता है। अधिक जानकारी के लिए वेबसाइट ुुुळरींेीसळप देख सकते हैं।

मैथेमैटिक्स ओलम्पियाड

इस परीक्षा का आयोजन नेशनल बोर्ड ऑफ हायर मैथेमैटिक्स तथा डिपार्टमेंट ऑफ एटोमिक एनर्जी द्वारा किया जाता है। रीजनल मैथेमेटिक्स ओलम्पियाड का आयोजन क्षेत्रवार सितंबर से दिसबर माह तक समूचे देश में किया जाता है। १२वीं कक्षा तक के छात्र इसमें शामिल हो सकते हैं। इसमें प्रदर्शन के आधार पर ही नेशनल मैथेमैटिक्स ओलम्पियाड में शामिल हो पाना संभव है। इसका आयोजन आखिल भारतीय स्तर पर फरवरी में होता है। शीर्ष ५ सफल प्रतियोगियों को इंटरनेशनल मैथेमैटिक्स ओलम्पियाड में भेजा जाता है। इन सभी प्रतियोगी परीक्षाआें की तैयारी के क्रम में युवा आईआईटी तथा अन्य परीक्षाआें की भी तैयारी आसानी से कर सकते हैं।

ग्रीन ओलम्पियाड

यह स्कूली छात्रों के लिए एनवायरमेंट ओलम्पियाड कहा जा सकता है। इसका आयोजन पर्यावरण एवं वन मंत्रालय द्वारा किया जाता है। इस परीक्षा में ८वीं, ९वीं और १०वीं के विद्यार्थी शामिल हो सकते हैं। इसमें सफल होने वाले युवाआें को नकद पुरस्कार दिया जाता है तथा ‘टेराम्बिज’ नामक एक टेलीविजन कार्यक्रम में हिस्सा लेने का भी इन्हें मौका मिलता है।

नेशनल ग्रेजुएट एग्जामिनेशन इन फिजिक्स

इसका आयोजन इंडियन एसोसिएशन ऑफ फिजिक्स टीचर्स द्वारा किया जाता है। प्रतिवर्ष ५ से ६ हजार प्रत्याशी इसमें शामिल होते हैं। अधिक जानकारी के लिए ईमेल लींूरसऽीशवळषषारळश्रलो पर सम्पर्क कर सकते है। इनके अलावा तमाम अन्य परीक्षाआें के बारे में भी पता लगाया जा सकता है। इंटरनेट पर इस बारे में जानकारी हासिल करना कोई मुश्किल काम नहीं है।

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